कैसे करे छठ पूजा की तैयारी

छठ पूजा - चरण-दर-चरण
सूची सामग्री की तैयारी
(पूर्व-तैयारी) 2के 3 दिन पहले

सामन की सूची 
 बर्तन
सूप 
डोगरा/डोंगरा (सूप)
बांस/लकड़ी की थाली 
लोबरा/बार्टन।
ताजे fal
ताजा फल 
केला
संतरा
सेब 
गाजर
नया नारियल
 गुड़ (खोया/गुड़)
 गेहूं/चावल/बेसन

चढ़ाने के लिए सामग्री 

ठेकुआ 
फलाहार
सूखे मेवे
जनेऊ लोध/पकावन (घर में बना लें या विक्रेता से लें)।




पूजा के लिए सामग्री 



नए कपड़े 
पूजा के लिए दीपक
 मिट्टी का दीया
 घी
पवित्र जल 



पहले से तैयार रहे



स्नान कर नहा धोकर घर साफ करें 
पूजा स्थल किसी  (नदी/ताल/पोखरा)
 को साफ करें। वहां पर माता छठ की वेदी मिट्टी का बना ले ।

 पहला दिन क्या करें 

नहाय खाय (स्नान और शुद्ध भोजन)
 नहाय खाय (स्नान करके) प्रभाव शुद्ध भोजन लेते हैं - आम तौर पर घर का बना सादा खाना (चावल, दाल, सब्जी बिना प्याज-लहसुन)।

इस दिन से अगले दिन तक आंशिक तैयारी और मनोवैज्ञानिक तैयारी शुरू होती है (मन को संयमित करना)।

क्या करें:

पूरे घर की सफाई करें 

पूजा सामग्री तैयार करें 

 दूसरा दिन - खरना (संध्या व्रत आरंभ)

निर्जल व्रत समाप्त नहीं होता (यह दिन आमतौर पर निर्जल व्रत शुरू करने से पहले की अंतिम तैयारी है)।

रात्रि में खरना  सूर्य के दिन के बाद व्रत करने वाला व्यक्ति सामान्यतः शाम को घर में खरना करता है - इसमें चावल-दाल की खीर, ठेकुआ और गुड़ प्रमुख होते हैं। सभी अपने घर पर बनते है। खरना के बाद व्रत निर्जल (ना पानी, ना भोजन) होता है।

घर के सभी सदस्य परिवार के साथ संकल्प लें और परिवार की रीति के अनुसार पूजा करें।

प्रसाद बनाए खीर (चावल-दाल का मीठा व्यंजन), ठेकुआ, फल, नारियल, गुड़।

तीसरा दिन - संध्या अर्घ्य (संध्या अर्घ्य / सूर्यास्त पूजा)

यह दिन निर्जल व्रत के साथ जारी रहता है। शाम को नदी/ताल/जलाशय के किनारे करते हैं 

साध्य-समय सूर्यास्त से ठीक पहले

घाट पर साफ आसन/पोशाक पहने

पूजा-थाली (सूप) में ठेकुआ, फल, नारियल, गुड़ आदि सजाएँ।

दीप, घी, धूप-दीपक एक स्थान पर रखें।

सूर्य को अर्घ्य दें - हाथ जोड़कर नमस्कार करें और गीत/भजन/आरती करें।

कई जगह भक्त समूह में भजन-कीर्तन करते हैं शांति और अनुशासन बनाये रखें।

सुरक्षा सुझाव: तट पर देर तक स्थिर रहने से पहले जूता-चप्पल बाहर की ओर, रंगीन वस्तु नहीं लाएँ, छोटे बच्चों का ध्यान।

चौथा दिन - उषा अर्घ्य (उषा-अर्घ्य और व्रत विसर्जन)

त्योहार का प्रमुख चरण: सुबह सूर्योदय से पहले घाट पर पहुँचना ।

पूर्ण रात्रि जागरण करने वाले भक्त सूर्योदय के समय नदी के किनारे द्रुत-गति से उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

व्रत तोड़ना : सूर्य को अर्घ्य देने के बाद आस्था अपना निर्जल व्रत मनाती हैं फिर - पहले प्रसाद (ठेकुआ/फल) ग्रहण करती हैं, पानी/भोजन करती हैं।

पूजा के बाद प्रसाद बाँटें और घाट को साफ़ रखें (कोई प्लास्टिक न छोड़ें)।

क्या लें: थैला/बर्टन वापसी के लिए, साफ पानी की बोतलें, अपमान, प्राथमिक चिकित्सा किट।

6) प्रमुख वस्तुएँ (चेकलिस्ट)

ठेकुआ (घर पर बना/बनी हुई), फल, नारियल, गुड़

सूप/थाली (बांस का पारंपरिक सूप अच्छा है)

दीपक/घी, अगरबत्ती, पुष्प/पत्ते

या पारंपरिक वस्त्र (आराधना के लिए)

पोइंट, कप, पानी (वापसी के लिए)

व्रत के नियम ( दिशानिर्देश)

खरना के बाद निर्जल व्रत रखना (न खाना, न पानी पीना )होना चाहिए 

स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं से यदि कोई व्यक्ति व्रत न रख सके (गर्भवती, वृद्ध, बीमार), तो परामर्श लें स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें 

पर्यावरण का ध्यान रखें - प्लास्टिक का प्रयोग न करें; प्राकृतिक/कागज/बांस के बर्तनों का उपयोग बढ़ाने वाले तत्व।

छोटे-छोटे उपयोगी सुझाव

पहले से मौसम के अनुरूप कपड़े - ठंड/गीली स्थिति में गर्म पहनना जरूरी है ।



मोबाइल पर सूर्य-उदय/सूर्यास्त का सही समय पहले जान लें (स्थानीय समय)।

घाट की शांति की रहस्योद्घाटन में फोटो/वीडियो लें - पूजा के समय शोर न करें।

व्रत के बाद प्रसाद बाँटे जाने वाले प्रसाद को स्वच्छ तरीके से पैक करें।

9) संक्षेप में - चार-दिन की समयरेखा

तैयारी - सामग्रियां, सफाई, घर-व्यवस्था

नहाय खाय (दिन 1) - शुद्ध स्नान और प्रभाव भोजन
खरना (दिन 2 बजे) - खेड/ठेकुआ खा निर्जल व्रत आरंभ

संध्या अर्घ्य (दिन 3 संध्या) - घाट पर सूर्य-अर्घ्य

उषा अर्घ्य (दिन 4 बजे) - उगते सूर्य को अर्घ्य, व्रतविसर्जन
आशा करते है की ये ब्लॉग पसंद आया होगा तो इसे अपने साथी के साझा या शेयर करके ये जानकारी किसी और को पहुंचा सकते है
आपका बहुत अबाउट आभार
आप उत्तर प्रदेश का ब्लॉग वीडियो देखना चाहे तो ये है लोग 🔗 https://youtu.be/XFZpkINI3Ls?si=4QihWtFz3d-OozHb

Popular posts from this blog

जिला गोरखपुर-उत्तर प्रदेश

ऐसे इस हाथ की अंगुली को ऐसे दबाओगे तो क्या से क्या हो जाएगा

सिद्ध धाम बाबा कृपा नाथ मंदिर भक्ति, शक्ति और सिद्धि का पावन धाम